ऑस्ट्रेलिया की चर्चित महिला यात्री Paula Constant जिन्होंने पैदल चल कर हजारो मील की यात्राऐ की है ! पाउला कांस्टेंट सारी दुनिया की औरतो के लिए मिशाल है !दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तान सहारा को अपने कदमो से नापा और इस अनुभव को किताब के द्वारा साझा किया !बहुत कम लोग होते है ! अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारणन करते है !और उस लक्ष्य को पाने में अपना सब कुछ लगाना पड़ता है ! पौला कांस्टेंट उनमे से एक है !अभी कुछ दिन पौला कांस्टेंट का इंटरव्यू छपा था जिसके कुछ अंश में आपके साथ share कर रहा हूँ
- पहली यात्रा का इरादा कब जन्मा ?
शुरुआती पढाई ऑस्ट्रेलिया में बोर्डिंग स्कूल से हुई ही !ऐसे में आत्मनिर्भर बचपन से ही हो गई थी !अपना काम करने के लीए किसी और की तरफ नहीं देखती थी !और एक सपना बचपन से ही था की एक दिन दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तान का सफर जरूर करुँगी !पठार मुझे हमेशा ही अपनी और आकर्षित करते रहे है ! इसके लिए मैंने काफी लंबा इंतजार करना पड़ा ! प्राइमरी टीचर के तौर पर बच्चो को पढ़ा रही थी एक दिन ख्याल आया की अब यात्रा शुरू कर देनी चाहिए हम कारों से ट्रेनों से बसो से घूमते रहते थे ! आखिरकार इरादा किया की कुछ यात्रा पैदल की जाए !
- कहाँ से शुरू किया सफर ?
2004 में एकाएक फैसला लिया और बैकपैक्स कंधो के पीछे लटका लिए ! लन्दन के ट्रैफलगर स्क्वायर से यात्रा शुरू की और फिर 12 हजार ,500 किलीमीटर का सफर इसमें शामिल है ! फ्रांस स्पेन की सीमा ,पुर्तगाल ,अल्जीरिया ,मोरक्को के कई इलाके भी नाप लिए ! शुरआती दिनों में पति गैरी और ऊँट साथ थे !इनके अलावा और कोई भी नहीं !कई जगह गाइड को भी साथ लिया ! कुल आठ देशो की सीमाए पार की !कुछ समय बीतने पर गैरी यात्रा से अलग हो गए !बाद में इन्ही अनुभवों के आधार पर पहली दो किताबे लिखी !
- घुमक्क्ड़ी से कैसे अनुभव मिले ?
हर लम्हे का हर कदम का आनंद लिया ! पूरी प्रोसेस जादुई थी हर लम्हे में महसूस होता की रोम रोम में एनर्जी भरती जा रही है यात्राओ का दौरान करिश्माई विविधता से हम रूबरू होते है तरह तहर के लोग मिलते है वह अनुभव और कंही नहीं मिल सकता सच तो ये है की यात्राए हमें बहुत कुछ सिकती है !
- तो क्या हर वक्त सारा सामान अपनी पीठ पर लाद रखा था !
नहीं दिन में तपते और रात से थरथराते रेगिस्तान में पैदल चलना ही दूभर होता है ऐसे में सामान लाद कर चलना आसान नहीं होता !हमारा सामान ऊँट पर लदा था !कुल २० किलो वजन ले जाने की सलाह दी थी लेकिन चलते चलते ज्यादा भार हो गया था !हम जरूरत होने पर ऊँट से सामान उतार लेते थे! ऊँट बहेतरीन साथी होते है ! वे वफादार ,मेहनती है ,लेकिन जो लोग ऊँट को संभालना नहीं जानते उनके लिए मुश्किले भी पैदा हो जाती है ! मै ऐसी ही नौसिखिया थी लेकिन ये ख़ुसनसीबी है की यात्रा के दौरान सब कुछ अंडर कंट्रोल रहा !
- किन किन मुस्किलो का सामना करना पड़ा ?
घुमक्क्ड़ी के चलते मेरी शादी टूट गई ! पहले पहल पति गैरी साथ चले थे !मै किताब लिखना चाहती थी और वे फोटोग्राफी के शौकीन थे ! हमने बच्चे नहीं पैदा किए ताकि घूमने लिखने और फोटोग्राफी में कोई बाधा न आए !गैरी यात्रा पूरी किए बिना लोटना चाहते थे ! हमारे उद्देस्य अलग थे !कभी कभार असुरक्षा का अहशास भी हुआ !वे राते याद आती है !जब में सोये बिना सुबह होने तक चलती रहती थी ! वे दिन आँखों के सामने आ जाते है जब मै सुने रेगिस्तान में सिर्फ ऊँट थे और मै मजिल के पते बगैर चलती रहती थी !अंत तक सब कुछ ठीक हो गया! क्योकि जब लक्ष्य बड़ा हो तो सारी मुश्किले बोनी हो जाती है !
- आपकी नजर में किसी औरत का ट्रैवलर होना कितना मुस्किल होता है !
एक वुमन ट्रैवलर को हमेशा ऑब्जेक्ट की तरह देखा जाता है ! अगर आप इससे परेशान न हो फिर पुरष या स्त्री होने से फर्क नहीं पड़ता! मेरे पास लैपटॉप और कैमरा था और मैंने इनका इस्तेमाल करते हुए पुरे सफर का आनंद लिया !जीवन की अलग अलग हलचल को कैमरे में कैद किया !नोट्स बनाये ,अपने लिखे को कई ड्राफ्ट में संजोया ,फाइनल किया ! यह सिलसिला अलग अलग यात्राओ
में बरकार रहा ! कई बार तो ये भी हुआ की मै एक सफर पूरा करके रुकी हुँ कुछ लिखा है लेक्चर्स दिए ,फिर नई यात्रा के लिए निकल पड़ी हू ! हर यात्रा मुझमे नया जोश भर देता है !
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