Thursday, 16 April 2015

Internet Revolution(4G)





अपने मोबाइल  फ़ोन में इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिया हम २जी ,3 जी या जीपीआरएस तकनीक का इस्तेमाल करते है !ये सभी वायरलेस दूरसंचार तकनीक है !जिनके जरिए साउंड और डेटा का ट्रांसमिशन होता है! 1जी( एनॉलॉग) first Generation ,2जी (डिजिटल )second Generation और 3जी (स्पीड स्पेक्ट्रम ) third Generation की दूरसंचार तकनीक है !जब की 4G  Fourth generation  की तकनीक है !4G एक मोबाइल दूरसंचार तकनीक है ,जिसका इस्तेमाल वॉयस टेलीफोन कॉलिंग के लिए भी किया जा सकता है! और मोबाइल ब्रॉडबैंड इंटरनेट एक्सेस के लिए भी !यह 2 जी और 3 जी से ज्यादा ताकतवर है !इसमें इंटरनेट की स्पीड  3 जी के मुकाबले 10 गुना बढ़ जाती है   एक समय में अधिक से अधिक देता डाउनलोड किया जा सकता है! 4 जी connection से अपने smartphone में बातचीत से लेकर internet सफ्फ्रिंग से लेकर व्हाट्सअप तक का इस्तेमाल कर सकते है 
4 जी के साथ दुनिया में सबसे पहले 
4 जी सेवा की शुरुआत सबसे पहले TeliaSonera  operator  के द्वारा 2009 में Stockholm and Oslo के सिटी सेंटर से की गई थी उसके एक साल बाद 4 जी सेवा को Finland में launch किया था !2014 में teliasonera operator  10 देशो तक 4जी  सेवा प्रदान करती थी!TeliaSonera was the first telecom operator in the world to launch 4G commercially सबसे पहले 14 दिसंबर, 2009 को  स्टॉकहोम और ओस्लो - कि स्वीडन और नॉर्वे की राजधानियों में 4 जी सेवा का शुभारम्भ हुआ। जून 2010 में स्वीडिश क्राउन राजकुमारी की  'रॉयल ​​वेडिंग के दौरान, स्वीडिश टीवी कंपनियों  ने स्टॉकहोम  समारोह से 4 जी के माध्यम से लाइव प्रसारित किया था !
 2008 में teliasonera ने एक auction के द्वारा 5  Post and Telecom Authority (PTS) के Swedish license प्राप्त किये थे !यह  नीलामी 16 दिन  और 112  बोली लगने के बाद बंद हुई थी !  जिनकी कुल कीमत 2 बिलियन swedish crown थी  !

घर में connectivity  4G  के लिए क्या चाहिए ?
4G तकनीक मोबाइल गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाली वायरलेस तकनीक है !यह घरो में तार बिछाकर देने वाले ब्रॉडबैंड इंटरनेट connection से अलग है !3 जी की तरह यह उन गैजेट्स के लिए है जिनमे मोबाइल सिम कार्ड लगता है जैसे smartphone ,tablet ,detacard   स्मार्टफोन के जरिए फ़ोन करने और उनमे इंटरनेट से जुडे  कामकाज करने की लिए आप 4 जी का इस्तेमाल कर सकते है लैपटॉप या डेस्कटॉप में डेटाकार्ड लगा कर इंटरनेट एक्सेस करने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते है 
क्या 3 जी 4 जी में कनवर्ट हो जायेगा?
4 जी कनेक्शन अलग से लेना होगा हो सकता है कुछ ऑपरेटर 4 जी अपग्रेड प्लान लॉच करे !अगर किसी जगह 4 जी फ्रीक्वेंसी ना मिले तो उस स्थति में वह 3 जी या 2 जी का इस्तेमाल करते हुए काम करेगा !
4 जी के फायदे !
  • आप अपने मोबाइल बिना रुके ,बिना फबरिंग के मोबाइल टीवी देख सकते है !
  • वेब पेज के लोड होने में कोई देरी नहीं लगेगी !
  • स्काईप और गूगल हैंगआउट्स जैसी वीडियो कॉल ज्यादा सुगमता से हो सकेगी !
  • ऑनलाइन मल्टीप्लयेर गेम खेलना ज्यादा आसान हो जायेगा ,
  • सॉफ्टवेयर ,एप्प्स ,मूवी ,और फाइल झटपट downlode हो जयेगी !
  • वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में अच्छी वीडियो क्वॉॅलिटी रहेगी और मैसेज पाने के लिए इन्तजार नहीं करना पड़ेगा !
4 जी सपोर्ट करने वाले स्मार्टफोन 
आईफ़ोन6 ,आईफ़ोन 5एस ,आईफोन 5सी , श्याओमी रेडनी नोट 4 जी ,लेनोवो ए 6000 ,माइक्रोमैक्स यू यूरेका ,लूमिया 638 ,सैमसंग ग्लैक्सी नोट 3,सैमसंग ग्लैक्सी एस  4 ,जोलो एलटी 900 ,एलजी जी 3 ,एलजी जी 2 ,एचटीसी डिजायर 820 ,अोपोएन 3 जिओनी पायनीयर 5 पीएल ,आदि 

  भारत में 4 जी 
भारत में 4 जी की शुरुआत 2012 हो गई थी लेकिन कुछ बेसिक कमियों के कारण इसका दायरा बेहद सिमित रहा !अब एयरसेल और एयरटेल ने करीब एक दर्जन शहरों में 4 जी सेवा शुरू कर दी है जबकि रिलायंस जियो इंफोकॉम की तरफ से इसे बहुत बड़े पैमाने पर शुरू किया जा रहे है  

 
  






Friday, 10 April 2015

घुमक्क्ड़ औरत !

ऑस्ट्रेलिया की चर्चित महिला यात्री Paula Constant जिन्होंने पैदल चल कर हजारो मील की यात्राऐ  की है ! पाउला कांस्टेंट सारी दुनिया की औरतो के लिए मिशाल है !दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तान सहारा को अपने कदमो से नापा और इस अनुभव को किताब के द्वारा साझा किया !बहुत कम लोग होते है ! अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारणन करते है !और उस लक्ष्य को पाने में अपना सब कुछ लगाना पड़ता है ! पौला कांस्टेंट उनमे से एक है !अभी कुछ दिन पौला कांस्टेंट का इंटरव्यू छपा था जिसके कुछ अंश में आपके साथ share कर रहा हूँ

  • पहली यात्रा का इरादा कब जन्मा ?
शुरुआती पढाई ऑस्ट्रेलिया में बोर्डिंग स्कूल से हुई ही !ऐसे में आत्मनिर्भर बचपन से ही हो गई थी !अपना काम करने के लीए किसी और की तरफ नहीं देखती थी !और एक सपना बचपन से ही था की एक दिन दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तान का सफर जरूर करुँगी !पठार मुझे हमेशा ही अपनी और आकर्षित करते रहे है ! इसके लिए मैंने काफी लंबा इंतजार करना पड़ा ! प्राइमरी टीचर के तौर पर बच्चो को पढ़ा रही थी एक दिन ख्याल आया की अब यात्रा शुरू कर देनी चाहिए हम कारों से ट्रेनों से बसो से घूमते रहते थे ! आखिरकार इरादा किया की  कुछ यात्रा पैदल की जाए !
  • कहाँ से शुरू किया सफर ?
2004 में एकाएक फैसला लिया और बैकपैक्स कंधो के पीछे लटका लिए ! लन्दन के ट्रैफलगर स्क्वायर से यात्रा शुरू की और फिर 12 हजार ,500 किलीमीटर का सफर इसमें शामिल है ! फ्रांस स्पेन की सीमा ,पुर्तगाल ,अल्जीरिया ,मोरक्को  के कई इलाके भी नाप  लिए ! शुरआती दिनों में पति गैरी और ऊँट साथ थे !इनके अलावा और कोई भी नहीं !कई जगह  गाइड को भी साथ लिया ! कुल आठ देशो की सीमाए पार की !कुछ समय बीतने पर गैरी यात्रा से अलग हो गए !बाद में इन्ही अनुभवों के आधार पर पहली दो किताबे लिखी !

  • घुमक्क्ड़ी से कैसे अनुभव मिले ?
हर लम्हे का हर कदम का आनंद लिया ! पूरी प्रोसेस जादुई थी हर लम्हे में महसूस होता की रोम रोम में एनर्जी भरती  जा रही है यात्राओ का दौरान  करिश्माई विविधता से हम रूबरू होते है तरह तहर के लोग मिलते है वह अनुभव और कंही नहीं मिल सकता सच तो ये है की यात्राए हमें बहुत कुछ सिकती है !

  • तो क्या हर वक्त सारा सामान अपनी पीठ पर लाद रखा था !
नहीं दिन में तपते और रात से थरथराते रेगिस्तान में पैदल चलना ही दूभर  होता है ऐसे में सामान लाद कर चलना आसान नहीं होता !हमारा सामान ऊँट पर लदा था !कुल २० किलो वजन ले जाने की सलाह दी थी लेकिन चलते चलते ज्यादा भार हो गया था !हम जरूरत होने पर ऊँट से सामान उतार लेते थे! ऊँट बहेतरीन साथी होते है ! वे वफादार  ,मेहनती है ,लेकिन जो लोग ऊँट को संभालना नहीं जानते उनके लिए मुश्किले भी पैदा हो जाती है ! मै ऐसी ही नौसिखिया थी लेकिन ये ख़ुसनसीबी है की यात्रा के दौरान सब कुछ अंडर कंट्रोल रहा !

  • किन किन मुस्किलो का सामना करना पड़ा ?
घुमक्क्ड़ी के चलते मेरी शादी टूट गई ! पहले पहल पति गैरी साथ चले थे !मै किताब लिखना चाहती थी और वे फोटोग्राफी के शौकीन थे ! हमने बच्चे नहीं पैदा किए ताकि घूमने लिखने और फोटोग्राफी में कोई बाधा न आए !गैरी यात्रा पूरी किए बिना लोटना चाहते थे ! हमारे उद्देस्य अलग थे !कभी कभार असुरक्षा का अहशास भी हुआ !वे राते याद आती है !जब में सोये बिना सुबह होने तक चलती रहती थी ! वे दिन आँखों के सामने आ जाते है जब मै सुने रेगिस्तान में सिर्फ ऊँट थे और मै मजिल के पते बगैर चलती रहती थी !अंत तक सब कुछ ठीक हो गया! क्योकि जब लक्ष्य बड़ा हो तो सारी मुश्किले बोनी हो जाती है !
  • आपकी नजर में किसी औरत का ट्रैवलर होना कितना मुस्किल होता है !
एक वुमन ट्रैवलर को हमेशा ऑब्जेक्ट की तरह देखा जाता है ! अगर आप इससे परेशान न हो फिर पुरष या स्त्री होने से फर्क नहीं पड़ता! मेरे पास लैपटॉप और कैमरा था और मैंने इनका इस्तेमाल करते हुए पुरे सफर का आनंद लिया !जीवन की अलग अलग हलचल को कैमरे में कैद किया !नोट्स बनाये ,अपने लिखे को कई ड्राफ्ट में संजोया ,फाइनल किया ! यह सिलसिला अलग अलग यात्राओ  
में बरकार रहा ! कई बार तो ये भी हुआ की मै एक सफर पूरा करके रुकी हुँ कुछ लिखा है लेक्चर्स दिए ,फिर नई यात्रा के लिए निकल पड़ी हू ! हर यात्रा मुझमे नया जोश भर देता है !




Wednesday, 1 April 2015

असंभव भी संभव A Motivation Story

जापान के सिजुका के TENRU में 17 नवंबर 1906 में एक लड़के सोइचूरू हौंडा का जन्म हुआ ! बचपन से ही वह बच्चा अपने पिता की साईकिल रिपेयरिंग की दुकान में उनकी मदद करता था ! आर्थिक रूप से निम्न परिस्थियों में पलने के बाद भी हमेशा वह खुश रहना जनता था और पिता तरह ही HARD WORK करता था !सोइचूरू की स्कूल में कम मार्क्स मिलने के बाद MARK SHEET घर पर सील लगाने के लिय  भेजी जाती थी ताकि PARENTS भी देख सके की बच्चा क्या कर रहा है ! ऐसी स्थति से निपटने के लिय उसने घर पर सील बना ली और हमेशा स्कूल में खुद जाकर देने लगा !और इसी तरह वह अपने साथियोँ की भी मदद करने लगा तो एक जैसी सील हर बच्चे की मार्कशीट में लगने के कारण राज खुल गया ! और वह ज्यादा नहीं पढ पाया और 15 साल की उम्र में कमाने के उद्देश्य से टोकियो जापान चला गया और कर मैकेनिक का काम करने लगा और कुछ समय बाद वह अपने घरमे मोटर सायकिल रिपेयरिंग का काम करने  लगा ! एक दिन  वह नौकरी का इंटरव्यू देने के लिए टोयटा कंपनी में गया और उसे काम देने से इंकार कर दिया की वह इस नौकरी के लिए फिट नहीं है !उसी समय उसने तय किया की मुझे ऐसी कंपनी बनानी है जो टोयटो की प्रतिस्पधी हो !और यही से दुनिया की न. वन HONDA मोटर कंपनी का जन्म हुआ !और बाद में दुनिया की सबसे ज्यादा पसंद करने वाली मोटर सायकिल निर्माता कंपनी बनी और वह व्यक्ति हौंडा का संस्थापक सोइचूरी हौंडा था !अगर उसे टोयटो में नौकरी मिल जाती तो शायद होना का जन्म भी नहीं होता और वह एक इंजीनयर की नौकरी कर रहा होता !
विशेष :-जीवन में कोई भी बड़ा काम करने के लिए बड़े अवसर और पूंजी की आवस्कता नहीं होती है बस खुद पर भोरसा और hard work करने के लिया तैयार होना चाहिए चाहे परस्थितियां कैसी भी हो !